प्रवर्तन निदेशालय (ED) की मुंबई यूनिट ने निजी कंपनी पैनकार्ड क्लब्स लिमिटेड (PCL) और अन्य के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत विभिन्न राज्यों में स्थित 646.58 करोड़ रुपये की 211 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। यह कार्रवाई कथित 4,387 करोड़ रुपये के पोंजी स्कीम आधारित निवेश धोखाधड़ी मामले में की गई है।
कुर्क की गई संपत्तियों में महाराष्ट्र, केरल, उत्तराखंड, गोवा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और दादरा एवं नगर हवेली में स्थित कार्यालय, लग्जरी होटल, रिसॉर्ट, कृषि भूमि और आवासीय संपत्तियां शामिल हैं। ये संपत्तियां PCL और पैनोरमिक यूनिवर्सल लिमिटेड, उनकी सहयोगी कंपनियों तथा उनके लाभार्थी मालिकों और परिवार के सदस्यों के नाम पर हैं।
ED की जांच दादर पुलिस द्वारा PCL और अन्य के खिलाफ दर्ज मामले पर आधारित है। बाद में इस मामले की जांच मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने अपने हाथ में ले ली थी। EOW ने 31 दिसंबर 2021 को शहर की विशेष MPID (महाराष्ट्र प्रोटेक्शन ऑफ इंटरेस्ट ऑफ डिपॉजिटर्स एक्ट) अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था।
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पैनोरमिक ग्रुप ऑफ कंपनीज के तहत 46 कॉर्पोरेट संस्थाओं का नेटवर्क बनाया था। इसके बाद टाइम-शेयर हॉलिडे मेंबरशिप और रियायती होटल रूम स्टे बेचने के नाम पर अवैध पोंजी योजनाएं चलाई। इन योजनाओं के जरिए देशभर में 51 लाख से अधिक निवेशकों को अवास्तविक वित्तीय रिटर्न का लालच दिया गया।
ED अधिकारियों के अनुसार, SEBI के नियमों के कथित उल्लंघन में चलाई गई इस ‘कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम’ के तहत PCL ने 1997-98 से 2017-18 के बीच निवेशकों से 9,577 करोड़ रुपये जुटाए। इसमें से केवल 2,858 करोड़ रुपये जमाकर्ताओं को लौटाए गए, जबकि 2,332 करोड़ रुपये एजेंटों को कमीशन के रूप में दिए गए। इसके बाद 4,387 करोड़ रुपये अपराध से अर्जित आय (Proceeds of Crime—POC) के रूप में बची, जिसे आरोपी संस्थाओं और प्रमुख व्यक्तियों द्वारा अपने पास रखा और दूसरी जगहों पर स्थानांतरित किया।
जांच में यह भी सामने आया कि धनराशि को कई फर्जी कंपनियों के जरिए व्यवस्थित तरीके से इधर-उधर किया गया और बाद में पैनोरमिक यूनिवर्सल लिमिटेड तथा उसकी भारत और विदेश स्थित सहायक कंपनियों जैसी संबद्ध संस्थाओं में डाला गया। ED अधिकारियों के मुताबिक, इस अपराध से अर्जित आय के एक हिस्से का इस्तेमाल भारत और विदेशों में महंगी अचल संपत्तियां, रिसॉर्ट और व्यावसायिक इकाइयां खरीदने में किया गया। इन संपत्तियों को ग्रुप की कंपनियों, उनके निदेशकों और परिवार के सदस्यों के नाम पर खरीदा गया और कथित तौर पर इन्हें “बेदाग संपत्ति” के रूप में पेश करने का प्रयास किया गया।
ED के अनुसार, SEBI और MPID अधिकारियों द्वारा पहले से कुर्क की गई संपत्तियों को कथित तौर पर धोखाधड़ी से बेचकर कानूनी कार्रवाई को विफल करने का भी प्रयास किया गया। उदाहरण के तौर पर, पनवेल के काल्हे गांव में 7.08 हेक्टेयर जमीन को SEBI और MPID के सक्षम प्राधिकारी के मौजूदा कुर्की आदेशों के बावजूद कथित तौर पर अनधिकृत रूप से बेच दिया गया।
ED के एक अधिकारी ने बताया कि, “यह लेनदेन एक ऐसी फर्जी बोर्ड रेजोल्यूशन का इस्तेमाल करके किया गया, जिस पर बंद हो चुकी कंपनी की ओर से एक मृत निदेशक के हस्ताक्षर दर्शाए गए थे।”
इससे पहले 2025 में ED ने विदेशों में स्थित 30 अचल संपत्तियों को भी अस्थायी रूप से कुर्क किया था। अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और थाईलैंड में स्थित इन संपत्तियों की अनुमानित कीमत 54.31 करोड़ रुपये थी। ये संपत्तियां पैनोरमिक यूनिवर्सल लिमिटेड की विदेशी सहायक कंपनियों और अन्य से संबंधित थीं। PMLA की एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने 9 अक्टूबर 2025 को इस कुर्की की पुष्टि की थी।
अब तक इस मामले में PMLA के तहत अस्थायी रूप से कुर्क की गई अपराध से अर्जित संपत्तियों (POC) की कुल कीमत 700.89 करोड़ हो गई है।
